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तारा महा विद्या साधना

तारा महा विद्या साधना 
 
वैदिक काल से आज तक समस्त ऋषियों, साधुओं और सन्यासियों ने एक स्वर से स्वीकार किया है कि संसार की सर्वोत्कृष्ट महा विद्याओं, साधनाएँ है । इसमें से 'तारा महाविद्या साधना 'सर्वक्षेष्ठ एवं सौभाग्यदायक कहीं गयी है ।अन्य साधनाएँ तो साधक कभी भी कर सकता है, पर तारा महा विद्या साधना तो गुरु के सान्निध्य में सीखते हुए पूर्ण न्यास,ध्यान, विनियोग, यन्त्र -अंकन के साथ सिद्ध करने से जीवन में अद्वितीय धन -लाभ, व्यापार -वृद्धि और घर में स्वर्ण वर्षा होने लगती है ।
तारा महा विद्या साधना जीवन का सौभाग्य माना जाता है ।वशिष्ठ, विश्वामित्र आदि ऋषियों ने एक स्वर में स्वीकार किया है कि संसार में लक्ष्मी प्राप्ति से संबंधित सैकड़ों प्रयोग है, परन्तु तारा प्रयोग जैसी साधना जीवन में अन्यत्र नहीं है ।
सर्ववागीश्वरो मत्यो लोकवश्यो धनेश्वरः
रणे द्धूते विवादे च जयस्तस्य भवेद्धध्रुवम्
पुत्रपौत्रन्वितो मत्यौ विलासो सर्वयोषिताम्
शत्रवो दासतां यान्ति सर्वेषां वल्लभःसदा
तस्य गेहे स्थिरा लक्ष्मीव्वार्णी वक्त्रे वसेद्ध्रुवम्
तस्य सव्वार्त्थसिद्धिः स्याद्धन्मनसि वर्त्तते
भावार्थ -
अर्थात तारा साधना से निश्चय ही व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करने वाली शक्ति प्राप्त करता है ।उसकी वाणी में ऐसा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है कि बातचीत से पूरी दुनियाँ को वश में करने की सामर्थ्य रखता है ।उसकी मुकदमे, जुए,घुड़दौड़,या अन्य सभी स्थानों पर निश्चय ही विजय होती है ।पुत्र -पौत्र होते हैं ।घर में इतना अधिक धन आने लगता है कि विलासी जीवन सम्पन्न होने लगता है ।सारे शत्रु दास और नौकर की तरह वश में हो जाते हैं और पारिवारिक ऋण दूर होकर सुख शान्तितुल्यं बढ़ती है ।
उसके घर में स्थायी लक्ष्मी निवास करने लगती है और उसे समस्त प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होने से वह समाज में पूर्ण यश ,धन,मान, पद,प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल हो जाता है ।
नवरात्रि पर्व
तारा तन्त्र में लिखा है ---
मघायां श्रवणायां वा रेवत्यांच विशेषतः
पूर्ण सिद्धिर्भवेत्तस्य तारा साधना वपु
अर्थात यदि नवरात्रि रेवती नक्षत्र से प्रारंभ होती और उसमें साधक तारा साधना करे,उसे निश्चय ही पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है और वह जो कुछ चाहता है, उसमें सफलता मिलती हैं ।
यही नहीं ,अपितु इस समय ग्रहों की स्थिति भी साधकों के लिए पूर्ण मनोयोगपूर्ण होती है ।इस समय गुरु मीन राशि में तथा शनि वृश्चिक राशि में होता हैं ।'शक्ति -प्रमोद ' जैसे ग्रन्थ में लिखा है ----'
मीनराशौ गुरौ याते वृश्चिकस्थै शनैश्चरै
तारा सिद्धिर्भवेत्तस्य सिद्धिर्भवति पूर्णतः
अर्थात यदि प्रारब्धवश जीवन में नवरात्रि के दिनों में गुरु मीन राशि में और शनि वृश्चिक राशि में होऔर यदि ऐसे समय में तारा साधना सिद्ध की जायदाद,तो निश्चित ही उसे पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है और जीवन में आर्थिक दृष्टि से पूर्ण सफलता प्राप्त करता है ।नवरात्रि पर्व तारा साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है ।उच्चकोटि के योगी और साधक कई वर्ष प्रतीक्षा करते रहते हैं कि वे ऐसे शुभ रोगों से युक्त नवरात्रि में तारा साधना समपन्न कर पूर्ण सिद्धिर्भवेत्तस्य प्राप्त कर सकें ।
 
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