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विधि पूर्वक व्रत

यदि किसी जातक की कुंडली में कोई अशुभ ग्रह है अथवा किसी विशेष कार्य में बाधा आ रही हो तो उसे सम्बंधित वार में विधि पूर्वक व्रत रखने से उस फल की अवश्य प्राप्ति होती है-
 
रविवार के व्रत की विधि – सर्व मनोकामना की पूर्ती विशेषकर शत्रु विजय, पुत्र प्राप्ति, नेत्र रोग, कुष्ठ रोग के निवारण हेतु रविवार का व्रत किया जाता है | इस व्रत को सुर्याश्श्ठी , रथ सप्तमी अथवा शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से आरम्भ कर के प्रतेक रविवार कम से कम 12 या एक वर्ष रखे |
व्रत के दिन स्नानादि से निर्वित हो कर सूर्य के बीज मन्त्र “ॐ ह्रं ह्रीं ह्रोंम सः सूर्य नम: ” का कम से कम तीन माला कर के सूर्य भगवान का ध्यान करे |
उस दिन नमक तेल आदि से परहेज करे | सूर्य शांति हेतु माणक रत्न धारण करे | उस दिन लाल वस्त्र दान करना शुभ रहता है |
 
सोमवार के व्रत की विधि – यह व्रत श्रावण, चेत्र, वैशाख, कार्तिक या मार्गशीर्ष के महीनो के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से आरम्भ करे | इस व्रत को पांच वर्ष अथवा सोलह सोमवार श्रद्धा के साथ विधिपूर्वक करे |
व्रत आरंभ करने वाले स्त्री पुरुष प्रातकाल जल में कुछ काले तिल डाल कर स्नान करे | स्नानान्तर “ ॐ नमः शिवाय ” शिव मंत्रो द्वारा तथा श्वेत फूलों, सफेद चन्दन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल, गंगाजल से शिव पार्वती का पूजन करे |
भोजन एक समय नमक रहित होना चाहिए | व्रत के उधाप्पन में सफेद वस्तुओ का दान करना चाहिए जैसे -चावल, सफेद वस्त्र , बर्फी, दूध, दही, चांदी आदि |यह व्रत करने से मानसिक शांति हो कर मनोरथ सिधि होती है | उधाप्पन के दिन ब्राह्मणों तथा बच्चो को खीर पूरी मिष्ठान भोजन करवा कर यथाशक्ति दान दे |
चंद्रमा की शांति हेतु चांदी की अंगूठी में मोती धारण करे |
 
मंगलवार के व्रत की विधि – सर्व प्रकार के सुखो, रक्त विकार ,शत्रु दमन, स्वास्थ्य लाभ के लिए मंगलवार का व्रत उत्तम है| यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवा��
मंगलवार के व्रत की विधि – सर्व प्रकार के सुखो, रक्त विकार ,शत्रु दमन, स्वास्थ्य लाभ के लिए मंगलवार का व्रत उत्तम है| यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से आरम्भ कर के 21 सप्ताह तक यथाशक्ति रखे |
इस व्रत में गेहू और शक्कर सहित भोजन करे | भोजन नमक रहित एक समय करना चाहिए | इस व्रत से मंगल गृह के दोष दूर हो जाते है |
इस व्रत में हनुमानजी की लाल पुष्पों ,ताम्र बर्तन तथा नारियल से पूजा करनी चाहिए तथा हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए | मंगल की शुभता के लिए ताम्बे की अंगूठी में मूंगा धारण करना शुभ होता है|
 
बुधवार के व्रत की विधि -इस व्रत का प्रारंभ शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से करे |21 व्रत रखे | बुधवार के व्रत से बुध गृह की शांति तथा धन बुधि, विद्या और व्यापार में वृद्धि होती है|
व्रत के दिन स्नानौप्रांत हरे वस्त्र पहन कर श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करे| इस दिन एक समय नमक रहित जैसे -मूंगी से बना हलवा, मीठी पंजीरी, व मूंग के लड्डू का दान करे और स्वयं भी सेवन करे | व्रत के अंतिम बुधवार को मूंगी सहित भोजन ,हरे फल, हरा पीला वस्त्रदान करे | गाओं को हरा चारा डाले|
बुध गृह की शांति के लिए हरा वस्त्र धारण करना, छोटी इलाइची, तुलसी तथा कांसे के बर्तन में भोजन करना तथा पन्ना रत्न धारण करना शुभ रहता है |
 
बृहस्पतिवार के व्रत की विधि – यह व्रत गुरु गृह की शांति तथा विद्या बुधि, धन धान्य, पुत्र पोत्र विवाह आदि सुखो के लिए किया जाता है | यह व्रत शुकल पक्ष के प्रथम वीरवार से आरम्भ करके तीन वर्ष अथवा 16 वीरवार तक करना चाहिए |
व्रत के दिन स्नानादि से निर्वित होकर पीले वस्त्र धारण कर के पीले पुष्पों ,चने की दाल, पीला चन्दन, बेसन की बर्फी हल्दी व् पीले चावलों सहित भगवन विष्णु तथा ब्रहस्पति गुरु की पूजा करनी चाहिए|
वर्ती को उस दिन सिर नहीं धोना चाहिए तथा एक समय ही नमक रहित भोजन करना चाहिए| वर्ती को उस दिन भोग लगा कर किसी ब्राह्मन व् बालक को चने की दाल, बेसन की बर्फी, बेसन का हलुआ, लड्डू, पीले चावल, पीले वस्त्र दान करने चाहिए |
इस दिन केले की पूजा करनी चाहिए| बह्रास्पति की शुभता के लिए सोने की अंगूठी में पुखराज पहनना भी शुभ रहता है|
 
शुक्रवार के व्रत की विधि -यह व्रत धन,विवाह, संतान आदि भौतिक सुखो में वृद्धि कारक होता है| यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है|
इस व्रत को श्रावण मास के प्रथम शुक्रवार को प्रारंभ करने से विशेषकर लक्ष्मी की कृपा रहती है|
व्रत के दिन स्नानोपरांत सफेद वस्त्र धारण करके श्री लक्ष्मी देवी की धूप, दीप, श्वेत पुष्प, चन्दन, चावल,चीनी, सुपारी से पूजा करके बच्चों में बाँट दे| स्वयं भी एक समय श्वेत वस्तुओ का सेवन करे| नमक का प्रयोग न करे| यही पदार्थ हो सके तो एक आँख वाले भिक्षुक या श्वेत गाए को दे|
उधाप्पन उपरांत ब्राह्मणों एवं बालको में श्वेत वस्तुओ का दान करे|ये व्रत 21 या 31 मात्रा में करे|
 
शनिवार के व्रत की विधि -यह व्रत शनिग्रह की अरिष्ट शांति तथा शत्रुभय, आर्थिक संकट, मानसिक संताप का निवारण करता है,और धन धान्य और व्यापर में वृद्धि करता है|
यह व्रत शुक्ल पक्ष के शनिवार विशेषकर श्रावण मास के शनिवार के दिन लोह निर्मित शनि की प्रतिमा को पंचम्रित से स्नान करा कर धूप गंध ,नीले पुष्प, फल,तिल, लौंग,सरसों का तेल,चावल, गंगाजल,दूध ड़ाल कर पश्चिम दिशा की और अभिमुख होकर पीपल वृक्ष पर ड़ाल दे| 19 शनिवार करने के उपरांत उधापन के समय पिपलेश्वर महादेव का पूजन करे|
इस दिन शनि स्तोत्र का पाठ करे|जूते, जुराब, नीले रंग का वस्त्र, काली छतरी, काले तिल,,काले चने ,चाकू और तेल निर्मित पदार्थो का दान करे और एक समय नमक रहित भोजन करना चाहिए |
घोड़े की नाल का छल्ला पहनना चाहिए| हनुमानजी को तेल चढ़ाना चाहिए और संकटमोचन का पाठ करना चाहिए |
 
 
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